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कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग पर तहसील प्रशासन मौन नियम कहते हैं नोटिस, जुर्माना और ध्वस्तीकरण नहीं हुई कार्रवाई भूमि माफियाओं के हौसले बुलंद

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अमरीक सिंह

जलालाबाद दैनिक लोक भारती  में 13 अगस्त को प्रकाशित खबर नियमों को ताक पर रखकर की जा रही कृषि भूमि की प्लॉटिंग के बाद भी तहसील प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के अनुसार इस मामले में तहसीलदार और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को तुरंत नोटिस जारी करने और कानूनी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।

कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक में बदलने के लिए एसडीएम से धारा-80 के तहत अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना इसके प्लॉटिंग पूरी तरह अवैध है।

नगर जलालाबाद एवं नगर से सटे गांव सुल्तानपुर, पिटरामऊ, रुस्तमपुर सरैया, सुजावलपुर गुनारा, रौली बोरी, नगरिया , सिकंदरपुर अफगानान ककराह एवं गुलड़िया ग्राम पंचायत के गांव कलक्टरगंज में बगैर धारा-80 के उपजाऊ खेतों में ईंट लगाकर प्लांट काटकर प्लॉटिंग की जा रही है।


नियमानुसार तहसील प्रशासन को क्या करना चाहिए था .? राजस्व विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में निम्नलिखित कार्रवाई अनिवार्य है। बगैर धारा-80 के कृषि भूमि का आवासीय उपयोग करने पर जमीन मालिक को जवाब तलब का नोटिस। मौके पर चल रहे निर्माण कार्य और प्लॉटिंग को तुरंत रोकने का आदेश। कृषि भूमि का स्वरूप बदलने पर उसे वापस पुरानी स्थिति में लाने का आदेश। नियमों के उल्लंघन पर भारी आर्थिक जुर्माना।

लेकिन सूत्रों के अनुसार ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी तहसील से लेकर लेखपाल तक ने आंखें मूंद रखी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्राम पंचायत अध्यक्ष से लेकर सत्ता और विपक्ष के नेता भी इस अवैध व्यापार में लिप्त हैं।

अब सवाल यह है कि क्या नवागत एसडीएम जलालाबाद मधुसूदन गुप्ता इस पूरे मामले में जांच कमेटी बनाकर नियमानुसार नोटिस, जुर्माना और पुनरुद्धार की कार्रवाई करेंगे या मामला फाइलों में दब जाएगा।

बही जलालाबाद तहसीलदार राघवेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि क्षेत्र में बिना धारा 80 के हो रही अवैध प्लॉटिंग की लेखपाल द्वारा जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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